बगुला और केकड़ा हिंदी कहानी | Crane and the Crab Story in Hindi | Bagula Aur Kekda Ki Kahani
बगुला और केकड़ा हिंदी कहानी | Crane and the Crab Story in Hindi | Bagula Aur Kekda Ki Kahani
बगुला और केकड़ा हिंदी कहानी | Children Book Hindi Moral Stories
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किसी वन में एक बड़ा सा तालाब था जिसमें अनेक प्रकार के जीव रहते थे। तालाब के निकट के पेड़ पर एक बगुला भी रहता था जिसकी आंखें थोड़ी कमजोर थी और जिसे मेहनत करना बिल्कुल भी पसंद नहीं था और इसी कारण वह कभी-कभी भूखे पेट ही सो जाया करता था।
बगुला हर समय यह सोचता कि कैसे बिना परिश्रम किए उसे प्रतिदिन भोजन मिल जाए। वह हर दिन इस चीज के बारे में विचार करता और उपाय ढूंढने में अपना समय व्यर्थ भी करता परंतु कभी भी उसे ऐसा उपाय ना मिल पाया कि जिससे वह बिना मेहनत किए भोजन प्राप्त कर सके।
फिर एक दिन बगुले ने एक ऐसा उपाय ढूंढ लिया जिससे प्रतिदिन उसे बिना मेहनत किए भोजन की प्राप्ति हो जाएगी और वह अपना जीवन बड़े सुखमय तरीके से यापन कर सकेगा।
बगुले उपाय को अमल में लाया और तालाब के किनारे खड़े होकर जोर-जोर से आंसू बहाने लगा।
बगुले के ऐसा करने के कुछ समय पश्चात वहां एक केकड़ा आया और बगुले से कहने लगा कि क्या हुआ बगुले भाई, तुम इतने उदास क्यों हो? तुम्हारा काम तो मछलियों को पकड़ना है फिर तुम अपना काम छोड़कर यहां आंसू क्यों बहा रहे हो?
बगुले ने रोते हुए उत्तर दिया कि क्या बताऊं तुम्हें भाई केकड़े। मैंने अपनी जिंदगी में मछलियों का बहुत शिकार कर लिया और अब इससे अधिक पाप मैं नहीं कर सकता। मुझे अब ज्ञान की प्राप्ति हो चुकी है इसलिए मैं पास आई हुई मछलियों को भी नहीं पकड़ रहा और उन्हें ऐसे ही जाने दे रहा हूं।
केकड़े ने बगुले से कहा की यदि आप शिकार नहीं करेंगे तो भोजन कैसे मिलेगा और यदि भोजन नहीं मिलेगा तो जीवित कैसे रहोगे?
इस पर बगुले ने उत्तर दिया कि ऐसा जीवन जीकर करना भी क्या है और वैसे भी कुछ दिनों बाद तो हम सब मरने ही वाले हैं। मुझे एक बहुत बड़े महात्मा ने बताया है कि यहां 12 साल का अत्यंत लंबा अकाल पड़ने वाला है। उन महात्मा के मुख से निकली हुई वाणी कभी भी गलत नहीं होती है और उन्होंने आज तक जो भी भविष्यवाणी की है, वह हमेशा सत्य ही निकली है।
बाद में, केकड़ा तलाब के अन्य जीवो को बगुले के हृदय परिवर्तन के बारे में बताता है और साथ में उस 12 साल के अकाल की भी बात उनके समक्ष रखता है।
थोड़े समय पश्चात तलाब के सभी जीव बगुले के पास जाते हैं और उससे इस समस्या से निकलने का उपाय ढूंढने को कहते हैं।
बगुला उनसे कुछ समय मांगता है और फिर थोड़े समय पश्चात उनके समक्ष उपस्थित होकर कहता है कि उसे एक ऐसे तालाब के बारे में पता है जिसमें पहाड़ से एक झरना बहकर गिरता है और वह तालाब भी कभी नहीं सूखता।
बगुले की यह बात सुन सभी जीव अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं और बगुले की जय-जयकार करने लगते हैं।
फिर उनमें से कुछ जीव बगुले से कहते हैं कि हम उस तलाब तक कैसे पहुंच पाएंगे? इस विकट समस्या का भी कोई उपाय बता दीजिए।
इसके जवाब में बगुला उनसे कहता है कि तुम लोग चिंता मत करो, मैं हूं ना। मैं प्रतिदिन एक-एक करके तुम लोगों को अपनी पीठ पर बैठाकर, उस तालाब तक पहुंचाता रहूंगा। मैं अपना बचा हुआ शेष जीवन सबकी मदद करने में लगाना चाहता हूं और अब यही मेरे जीवन का उद्देश्य भी है।
बगुले द्वारा इस समस्या का हल देते ही तलाब के सभी जीव खुश हो गए और वे बगुले की जय जयकार का नारा और ऊंचे स्वर में लगाने लगे।
अगले दिन से बगुले द्वारा तालाब के जीवों को दूसरे तलाक तक ले जाने काम प्रारंभ हुआ। बगुला प्रतिदिन तलाब के किसी भी एक जीव को अपने पीठ पर बैठा कर ले जाता और थोड़ी दूरी पर एक चट्टान के पास ले जाकर उन्हें मारकर खा जाता। कभी-कभी जब बगुले को भूख अत्यधिक लगती तो वह तलाब के दो जीवों को ले जाता और उस दिन दो बार मांस को ग्रहण करता परंतु इसके लिए उसे दो बार चक्कर लगाना पड़ता था।
यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा जिसके कारण तालाब में जीवों की संख्या लगातार कम होने लगी और चट्टान के पास मरे हुए जीवों की हड्डियों की भरमार होने लगी।
कुछ दिनों बाद ही बगुले भगत की सेहत में भी सुधार होने लगा और वह पहले से अत्यधिक मोटा हो गया। इसके साथ ही उसके मुख पर लाली भी आने लगी जिसे देखकर तालाब के अन्य जीव कहने लगे,"यह देखो पुण्य कार्य को करने का फल। बगुले द्वारा पुण्य कार्य का फल उसके शरीर में साफ दिख रहा है।"
बगुला भगत तलाब में रहने वाले जीवों की यह बात सुनकर मन ही मन प्रसन्न होता और सोचता कि इस तलाब में कितने मूर्ख जीव रहते हैं जो उसके द्वारा कही हुई बातों को सच मान बैठे वो भी बिना किसी प्रमाण के।
कुछ दिनों तक इसी प्रकार बगुले द्वारा दूसरे तलाब तक ले जाने का ढोंग चलता रहा और फिर एक दिन केकड़े ने बगुले से आकर कहा कि बगुले भाई, मेरा उस तालाब तक जाने का समय कब आएगा।
केकड़े के सवाल का जवाब देते हुए बगुले ने कहा कि केकड़े भाई आज आपकी ही बारी है जिन्हें में उस तालाब तक ले जाऊंगा।
यह सुनते ही केकड़ा अत्यंत खुश हुआ और बगुले की पीठ पर बैठकर बगुले से चलने के लिए कहने लगा। बगुले को भी उस समय भूख लग रही थी इसलिए वह भी चलने के लिए निकल पड़ा।
केकड़ा बगुले की पीठ पर बैठकर उस तालाब के सपने देखने लगा और मन ही मन बहुत अधिक प्रसन्न होने लगा। थोड़ा सफर तय करने के पश्चात वे उस चट्टान के पास पहुंचे जहां कंकालों का ढेर लगा था।
कंकाल का ढेर देखकर केकड़े ने बगुले से पूछा कि बगुले भाई, वह तलाब यहां से कितनी दूरी पर है और हमें वहां पहुंचने तक कितना समय लगेगा?
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बच्चों के लिए लघु दृष्टांत
जीवन के पाठ पढ़ाने के लिए कहानियां बहुत अच्छे साधन हैं। ये छोटी दंतकथाएं एक अच्छा प्रभाव डालती हैं, खासकर छोटे बच्चों के दिलों में अच्छे व्यवहार और गुणों पर।
बच्चों को कहानियां पसंद हैं। कहानियों को सुनने की कल्पना में भटकना। कहानी में निहित नैतिकता निहित है। जितना अधिक वे कहानी सुनते हैं, उतनी ही अधिक संभावना है कि उनकी नैतिकता उनके मन को छू लेगी।
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